दुनिया भर से लाखों तीर्थ यात्री प्रति वर्ष अपने मृत परिजनों एवं पूर्वजों की मुक्ति के लिए गया में 'पिंड दान' करने आते हैं। हिंदू मान्यता है कि हर परिवार को अपने जीवन में कम से कम एक बार गया जाकर अपने पूर्वजों के लिए पिंड दान और उससे जुड़ी रस्में निभानी चाहिए, ताकि उन्हें मुक्ति और परलोक में शांति मिल सके। हमलोग गयाजी में पंडितों/पंडों एवं पुरोहितों की बुकिंग लेते है। हम लोग गयाजी में सभी तरह के श्राद्धकर्म एवं पिंड दान की सेवाएँ देते है, जैसे वार्षिक श्राद्ध, गया श्राद्ध, तर्पण श्राद्ध, त्रिपिंडी श्राद्ध, पितृ दोष पूजा, नारायण बलि श्राद्ध और नाग बलि श्राद्ध।
हमारी वेबसाइट पर आप पिंड दान के महत्व, इसकी प्रक्रिया और विभिन्न पिंड दान स्थल जैसे - विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी, अक्षयवट, सीता कुंड, रामशिला एवं प्रेतशिला के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं या हमसे फोन पर पूछ सकते है।
We provide all kinds of shradhkarm services in Gayaji like Gaya shradh, pind daan, varshik shradh, tarpan, pitru dosh pooja,
narayanbali puja, and tripindi puja.
पिंडदान (Pind Daan) हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जो दिवंगत आत्माओं (पूर्वजों) की शांति और उनकी मुक्ति के लिए किया जाता हैं।
श्राद्ध पूजा (पितृ पक्ष) पूर्वजों को समर्पित है, जिसे मुख्य रूप से दोपहर के समय किया जाना चाहिए। इसमें स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण (जल अर्पित करना) कौवे के लिए भोग निकालने की परंपरा है।
नारायण बलि श्राद्ध (Narayan Bali Shradh) एक विशेष हिंदू अनुष्ठान है जो मुख्य रूप से उन आत्माओं की मुक्ति के लिए किया जाता है जिसमें इंसान की अकाल मृत्यु या असमय मृत्यु हुई हो साथ ही प्रेत बाधा और पितृ दोष निवारण के लिए भी किया जाता हैं।
त्रिपिंडी श्राद्ध (Tripindi Shradha) पूर्वजों की आत्मा की शांति और पितृ दोष से मुक्ति के लिए किया जाने वाला एक विशेष अनुष्ठान है।
पितृ दोष निवारण पूजा (Pitru Dosh Nivaran Puja) पूर्वजों (Pitrus) की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद के लिए की जाने वाली एक वैदिक रस्म है।
श्राद्ध पक्ष (पितृ पक्ष) में पितरों की तृप्ति के लिए जल, काले तिल, दूध, और कुशा से किया जाने वाला तर्पण एक पवित्र अनुष्ठान है, जो पूर्वजों के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करता है।
अंत्येष्टि (अंतिम संस्कार) और श्राद्ध कर्म (पितृ तर्पण) सनातन धर्म के वे महत्वपूर्ण संस्कार हैं, जो दिवंगत आत्मा की शांति, सद्गति और मोक्ष के लिए किए जाते हैं।
अमावस्या श्राद्ध (जिसे सर्वपितृ अमावस्या या पितृ विसर्जन अमावस्या भी कहा जाता है) हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है।
वार्षिक श्राद्ध (बरसी) दिवंगत परिजन की मृत्यु तिथि पर प्रतिवर्ष किया जाने वाला एक पवित्र अनुष्ठान है, जो आत्मा की शांति, मोक्ष और पितृ ऋण से मुक्ति के लिए किया जाता है।
(यहाँ ऑनलाइन लाइव पिंड दान और श्राद्ध की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं।)
4 Main Places For Pind Daan Shradh At Gayaji
(फल्गु नदी)
(विष्णुपद मंदिर)
(अक्षय वट)
(प्रेतशिला)
विष्णु सहस्र नामों के साथ तुलसी पुष्प अर्चना - इस पूजन में विष्णु सहस्रनाम से श्री नारायण विष्णुपद के चरण पर तुलसी दल अर्पित किया जाता है । भगवान विष्णु को तुलसी चढ़ाने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और वैभव बढ़ता है। भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय है। तुलसी को अर्पिर्त करके भगवान विष्णु को प्रसन्न किया जा सकता है। कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी को तुलसी की पूजा करने से जिन लोगों की शादी में रुकावटें आ रही हैं वो दूर होती हैं। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा को भगवान विष्णु को तुलसी चढ़ाने का फल दस हज़ार गोदान के बराबर माना गया है।
जल और दूध से अभिषेक: इस पूजन में भगवान के चरणों पर वैदिक मंत्रों के द्वारा जल, दूध व पूजन समाग्री को अर्पिर्त कर ,सुख शांति समृद्धि ,परिवार के संतति के लिये प्रार्थना की जाती है यह वैदिक पौराणिक पूजन की विशिष्ट पद्धति है । वैशाख मास ,कार्तिक मास ,अगहन मास ,माघ मास में यह पूजन ,अभिषेक करना अनंत फलदायी होता है।
श्रृंगार पूजन: रात्रि श्रृंगार पूजन करने से भगवान विष्णु आशीर्वाद प्रदान करते है श्रृंगार पूजन से भगवान विष्णु को प्रसन किया जाता है।